चांद रोज़ छत पर आकर इतराता बहुत था

चांद रोज़ छत पर आकर इतराता बहुत था

चांद रोज़ छत पर आकर इतराता बहुत था,

कल रात मैंने भी उसे तेरी तस्वीर दिखा दी........!!!





अजीब सी बेताबी है तेरे बिना,

रह भी लेते है और रहा भी नही जाता…..!!!




तु मिल गई है तो मुझ पे नाराज है खुदा,

कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है.....!!!




अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे,

हर खवाब मे बुलाया है तुझे,

क्यू न करे याद तुझ को,

जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे........!!!




दिल की किताब में गुलाब उनका था,

रात की नींद में ख्वाब उनका था,

कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा,

मर जायंगे तुम्हारे बिना ये जबाब उनका था......!!!



तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,

कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…....!!!




हमारी तडप तो कुछ भी नहीं है हुजुर,

सुना है कि आपके दिदार के लिए तो आइना भी तरसता है…...!!!




पूछते थे ना कितना प्यार है हमें तुम से,

लो अब गिन लो… ये बूँदें बारिश की…...!!!




क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर,

जाने क्या हस्र होगा जब वो खुलकर मुस्कुरायेंगे.......!!!

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