तुम्हारी आँखों की गहराई में, खोना चाहता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखों की गहराई में, खोना चाहता हूँ मैं,
तुम्हारी आँखों की गहराई में,खोना चाहता हूँ मैं,
भरकर तुम्हे अपनी बाहों में,
सोना चाहता हूँ मैं
अपने प्यार पर है,
इतना यक़ीन दोस्तों,
कि जो हमारा हो गया,
वो कभी किसी और का नहीं हो सकता…
अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मेरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
समझता ही नहीं वो मेरे अलफ़ाज़ की गहराई
मैंने हर लफ्ज़ कह दिया जिसे मोहब्बत कहते है
अपनी मोहब्बत पे इतना भरोसा तो है मुझे,
मेरी वफायें तुझे किसी और का होने न देंगी।
प्यार मोहब्बत आशिकी.ये बस अल्फाज थे.
मगर.. जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले.
एक उमर बीत चली है तुझे चाहते हुए,
तू आज भी बेखबर है कल की तरह।
तुझे क्या पता कि मेरे दिल में,
कितना प्यार है तेरे लिए,
जो कर दूँ बयान तो,
तुझे नींद से नफरत हो जाए!
वो तो शायरों ने लफ्जो से सजा रखा है,
वरना मोहब्बत इतनी भी हसीँ नही होती।
हँसते हुए तुझको जब भी देखता हूँ मैं,
तू ही दुनिया है मेरी यही सोचता हूँ मैं।
हमे फिर सुहाना नज़ारा मिला है,
क्योंकि जिंदगी में साथ तुम्हारा मिला है,
अब जिंदगी में कोई ख्वाइश नही रही,
क्योंकि हमे अब तुम्हारी बाहों का सहारा मिला है
रूठ गया वो खुदा भी हमसे ।
जब हमने अपनी हर दुआ में आपको मागा।













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